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खूनी हवेली और वो 'नौटंकी' भूत: चुड़ैल चंद्रावती का खौफ (भाग 3) | Horror Comedy

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रमेश और समोसा की तहखाने में नटवरलाल नाम के एक 'भुक्खड़' भूत से दोस्ती हो जाती है। लेकिन उनकी यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई। अचानक तहखाने के दरवाज़े पर ज़ोरदार प्रहार होने लगे और सीढ़ियों से एक भयानक लाल रोशनी के साथ पायल की आवाज़ें नीचे उतरने लगीं— छम... छम... छम! यह हवेली की सबसे खतरनाक चुड़ैल 'चंद्रावती' थी!

अध्याय 9: खौफ का लाल साया

तहखाने का मोटा लकड़ी का दरवाज़ा एक जोरदार धमाके के साथ टूट गया। लकड़ी के टुकड़े हवा में उछले और सीधे नीचे आ गिरे। लाल रोशनी इतनी तेज़ थी कि रमेश की आँखें चौंधिया गईं। उस रोशनी के बीच से एक साया धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ नीचे उतर रहा था।

चंद्रावती के बाल ज़मीन तक लंबे थे और हवा में ऐसे लहरा रहे थे मानो उनमें ज़िंदा सांप गुंथे हों। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था और आँखों की जगह सिर्फ धधकते हुए लाल अंगारे थे। उसके पैरों में उल्टे घुंघरू बंधे थे, जिनसे खून टपक रहा था। यह नज़ारा इतना डरावना था कि किसी भी कमज़ोर दिल वाले इंसान की मौके पर ही जान निकल जाए।

रमेश के घुटने कांपने लगे। उसने पीछे मुड़कर नटवरलाल (भूत) को देखा, ताकि वह कोई भूतिया जादू करके उन्हें बचा ले। लेकिन जो उसने देखा, उस पर उसे यकीन नहीं हुआ।

नटवरलाल (जो खुद एक भूत था) एक पुराने ड्रम के पीछे दुबक कर बैठा था और अपनी आँखें बंद करके कांपते हुए बुदबुदा रहा था, "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर... जय कपीस तिहुं लोक उजागर..."
रमेश ने सिर पीट लिया— "हे भगवान! मेरा किस्मत ही खराब है। एक तो डरपोक दोस्त मिला और ऊपर से ये भूत भी हनुमान चालीसा पढ़ रहा है!"

अध्याय 10: समोसा का 'चटपटा' दिमाग

चंद्रावती अब तहखाने के बिल्कुल बीचों-बीच आ चुकी थी। उसने अपनी खौफनाक और गूंजती हुई आवाज़ में कहा...

"किसने मेरी नींद में खलल डाला? 200 सालों से मैं शांति की तलाश में हूँ। आज मैं तुम तीनों का खून पीकर अपनी प्यास बुझाऊंगी!"

चुड़ैल ने अपने लंबे, नुकीले नाखूनों वाले हाथ रमेश की गर्दन की तरफ बढ़ाए। रमेश की आँखों के सामने अपनी पूरी ज़िंदगी किसी फिल्म की तरह फ्लैश होने लगी। उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।

तभी पीछे से एक आवाज़ आई, "क्रंच... क्रंच... क्रंच..."

चुड़ैल के हाथ हवा में ही रुक गए। उसने गुस्से से मुड़कर देखा। समोसा आराम से एक पुरानी बोरी पर बैठा था और 'हल्दीराम के कुरकुरे' खा रहा था।

चुड़ैल की लाल आँखें और लाल हो गईं। "गुस्ताख इंसान! तू मौत के सामने बैठकर ये क्या चबा रहा है?"

समोसा ने बड़ी मासूमियत से कुरकुरे का पैकेट आगे बढ़ाते हुए कहा, "मैडम जी, आप बहुत स्ट्रेस (Stress) में लग रही हैं। 200 साल से सोई नहीं ना, इसलिए डार्क सर्कल्स हो गए हैं आँखों के नीचे। ये लीजिए, थोड़ा टेढ़ा है पर मेरा है, खा कर देखिए, मूड फ्रेश हो जाएगा!"

यह सुनकर नटवरलाल (भूत) ने पीछे से रमेश को फुसफुसाते हुए कहा, "ये तेरा दोस्त पक्का हमें मरवाएगा। ये चुड़ैल को कुरकुरे ऑफर कर रहा है!"

अध्याय 11: चुड़ैल का असली राज़

चुड़ैल चंद्रावती का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने ज़ोर से चीख मारी। उसकी चीख से तहखाने की दीवारें हिलने लगीं। उसने अपना हाथ हवा में घुमाया और समोसा के हाथ से कुरकुरे का पैकेट उड़कर दूर जा गिरा।

समोसा का चेहरा अब गंभीर हो गया। "देख आंटी, जान लेनी है तो ले ले, लेकिन खाने की चीज़ें मत फेंक! बहुत महंगाई है बाहर।"

"तुम मूर्खों को अंदाज़ा नहीं है कि तुम किस मुसीबत में फँस चुके हो! मैं तुम्हें मारना नहीं चाहती थी... मैं तो तुम्हें यहाँ से भगा रही थी!"

चंद्रावती के इस वाक्य ने तहखाने में सन्नाटा ला दिया। रमेश, समोसा और ड्रम के पीछे छिपा नटवरलाल, तीनों चौंक गए।

"क्या मतलब?" रमेश ने हिम्मत जुटाते हुए पूछा।

चुड़ैल की लाल आँखें अब थोड़ी शांत हो गई थीं। उसने भारी आवाज़ में कहा, "मैं और नटवरलाल तो इस हवेली के सिर्फ किराएदार हैं। हम तो छोटे-मोटे भूत हैं जो बस थोड़ा बहुत डरा कर अपना टाइम पास करते हैं। असली खतरा तो इस तहखाने के भी नीचे दफन है। और तुम लोगों ने शोर मचाकर उसे जगा दिया है!"

अध्याय 12: तहखाने के नीचे का शैतान (सस्पेंस)

चुड़ैल की बात खत्म होते ही, तहखाने की ज़मीन अचानक भूकंप की तरह कांपने लगी। ज़मीन पर बिछी पुरानी ईंटें अपने आप उखड़ने लगीं और उनके बीच से एक गहरी, काली खाई बन गई। उस खाई में से सड़े हुए मांस और सदियों पुरानी मौत की बदबू आने लगी।

नटवरलाल ड्रम के पीछे से रोते हुए चिल्लाया, "ओह नो! मालिक जाग गया! भागो रमेश, भागो!"

रमेश ने समोसा का हाथ पकड़ा और सीढ़ियों की तरफ भागने लगा। लेकिन तभी उस काली खाई में से एक भयानक, विशालकाय और काले रंग का हाथ बाहर निकला। उस हाथ में इंसानों जैसी कोई त्वचा नहीं थी, बस नुकीली हड्डियां और काला धुआं था।

इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उस विशालकाय हाथ ने समोसा के पैर को कसकर पकड़ लिया।

"रमेश! मुझे बचा!" समोसा चीखा।

वह हाथ समोसा को तेज़ी से उस काली खाई की तरफ खींचने लगा। रमेश ने समोसा के दोनों हाथ पकड़ लिए और पूरी ताकत से अपनी तरफ खींचने लगा, लेकिन उस शैतानी ताकत के सामने रमेश कुछ भी नहीं था।

चुड़ैल चंद्रावती और भूत नटवरलाल डर के मारे हवा में गायब हो गए, और रमेश के हाथ से समोसा का हाथ छूटता जा रहा था...

रोंगटे खड़े कर देने वाला सस्पेंस!

वह विशालकाय हाथ किसका था? 'मालिक' कौन है जो इस तहखाने के नीचे सदियों से दफन था? क्या रमेश अपने सबसे अच्छे दोस्त समोसा को उस शैतान के चंगुल से बचा पाएगा, या समोसा हमेशा के लिए उस खाई में समा जाएगा?

दिल थाम कर बैठिए! इस हॉरर-कॉमेडी कहानी का भाग 4 जल्द ही आ रहा है...

कहानी से जुड़े कुछ सवाल (Story FAQ)

चुड़ैल चंद्रावती हवेली में क्या कर रही थी?

चुड़ैल चंद्रावती 200 सालों से हवेली में रह रही है। हालाँकि वह भयानक दिखती है, लेकिन असल में वह रमेश और समोसा को हवेली के असली और खतरनाक शैतान से बचाने के लिए वहाँ से भगाना चाहती थी।

कहानी में कॉमेडी का सबसे मजेदार पल कौन सा है?

जब एक तरफ चुड़ैल हमला करने वाली होती है, और दूसरी तरफ नटवरलाल (जो खुद एक भूत है) डर के मारे हनुमान चालीसा पढ़ने लगता है। साथ ही समोसा का चुड़ैल को 'कुरकुरे' ऑफर करना पाठकों को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर देता है।

कहानी का भाग 4 (Part 4) कब पब्लिश होगा?

इस कहानी का रोंगटे खड़े कर देने वाला चौथा भाग HindiStories.site पर जल्द ही पब्लिश होगा, जहाँ तहखाने के नीचे छिपे 'मालिक' का राज़ खुलेगा।

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