Skip to main content

खूनी हवेली और वो 'नौटंकी' भूत: भुजिया चोर भूत और तहखाने का रहस्य (भाग 2) | Horror Comedy

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रमेश और समोसा हवेली के तहखाने (Basement) में फँस गए थे। अंधेरे में किसी ने रमेश का कंधा छुआ और समोसा के गाल पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। जैसे ही समोसा के मोबाइल की टॉर्च ब्लिंक हुई, रमेश ने देखा कि समोसा के ठीक पीछे एक भयानक चेहरा खड़ा था, और वह समोसा की आलू भुजिया खा रहा था!

अध्याय 5: भुजिया चोर भूत!

वह चेहरा इतना भयानक था कि रमेश की धड़कनें रुक सी गईं। उसकी त्वचा एकदम सफेद और सूखी हुई थी, आँखों की जगह सिर्फ सफेद गड्ढे थे, और उसके सिर पर एक पुराना, फटा हुआ मुकुट रखा था। वह हवा में ज़मीन से एक फुट ऊपर तैर रहा था।

रमेश का गला सूख गया, वह चीखना चाहता था, लेकिन उसकी आवाज़ गले में ही फंस गई। उसने कांपते हुए हाथ से समोसा की शर्ट खींची और इशारे से पीछे देखने को कहा।

समोसा ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, टॉर्च की रोशनी सीधे उस भूत के चेहरे पर पड़ी। कोई भी आम इंसान इस दृश्य को देखकर बेहोश हो जाता, लेकिन हमारा समोसा कोई आम इंसान नहीं था!

समोसा की नज़र भूत के खौफनाक चेहरे पर नहीं, बल्कि उसके हाथ में पकड़े भुजिया के पैकेट पर गई।
समोसा गुस्से से लाल होकर चिल्लाया, "ओए! तूने मेरी भुजिया क्यों खाई? एक तो थप्पड़ मारता है ऊपर से मेरा स्नैक चोरी करता है! शर्म नहीं आती इतने बड़े होकर बच्चों का खाना चुराते हुए?"

भूत, जो पिछले 150 सालों से लोगों को डरा-डरा कर हार्ट अटैक दे रहा था, समोसा की इस प्रतिक्रिया से एकदम बौखला गया। उसकी सफेद आँखों में कन्फ्यूजन (Confusion) साफ़ झलक रहा था।

अध्याय 6: 'नटवरलाल' द भूतिया एक्टर

"गुस्ताख इंसान! मैं इस खूनी हवेली का सबसे खूंखार साया हूँ! मैं तुम्हारी रूह कांपने पर मजबूर कर दूँगा..."

भूत ने अपनी भारी आवाज़ में गूंजते हुए कहा और हवा में थोड़ा और ऊपर उठ गया। तहखाने का तापमान अचानक शून्य से नीचे चला गया। रमेश के दांत किटकिटाने लगे।

लेकिन समोसा ने अपनी जैकेट की ज़िप बंद करते हुए कहा, "रूह तो बाद में कांपेगी, पहले मेरे 20 रुपये निकाल! मेरी भुजिया जूठी कर दी तूने।"

भूत हवा से नीचे ज़मीन पर उतरा। उसका सारा डरावनापन गायब हो चुका था। वह एक गहरी सांस (जो कि असल में सिर्फ हवा थी) लेते हुए बोला, "यार, तुम लोग डरे क्यों नहीं? मैं 150 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ। मेरा नाम 'नटवरलाल' है। 1920 के दशक का सबसे मशहूर थिएटर एक्टर!"

रमेश, जो अब तक दीवार से चिपका हुआ था, थोड़ी हिम्मत जुटाकर बोला, "त..तो तुम भूत कैसे बने?"

नटवरलाल (भूत) ने उदास होकर बताया, "एक नाटक के दौरान मुझे मंच पर गरम-गरम समोसे खाने का सीन करना था। समोसा इतना गरम था कि मेरे गले में अटक गया और पानी की जगह मैंने गलती से केरोसिन पी लिया। बस, वहीं मेरा 'द एंड' हो गया। तब से मेरी आत्मा भूखी भटक रही है। सच कहूँ तो मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था, मुझे बस तुम्हारी भुजिया की खुशबू आ गई थी।"

अध्याय 7: ऊपर वाली भूतनी का खौफ

यह सब सुनकर रमेश की जान में जान आई। चलो, कम से कम यह भूत खूंखार तो नहीं है, बस भुक्खड़ है, बिल्कुल मेरे दोस्त समोसा की तरह!

समोसा ने अपने बैग से एक पारले-जी का पैकेट निकाला और नटवरलाल को देते हुए कहा, "ये ले भाई, रो मत। पर अगली बार बिना पूछे कुछ मत उठाना।" भूत पारले-जी देखकर ऐसे खुश हुआ जैसे उसे ऑस्कर मिल गया हो।

रमेश ने राहत की सांस लेते हुए कहा, "चलो अच्छा है, हवेली का भूत तो अपना दोस्त बन गया। अब हमें डरने की कोई ज़रूरत नहीं।"

तभी नटवरलाल (भूत) के चेहरे की हवा उड़ गई (हालांकि वह पहले से ही भूत था, लेकिन उसका चेहरा अब खौफ से भर गया)। उसने पारले-जी का पैकेट अपनी फटी हुई जेब में छिपाया और कांपने लगा।

"अरे मूर्खों! किसने कहा मैं यहाँ का इकलौता भूत हूँ? मैं तो तहखाने में छिपकर रहता हूँ... असली खतरा तो ऊपर है!"

अध्याय 8: जब तहखाने का दरवाज़ा कांपा

रमेश और समोसा का खून जम गया।
"ऊपर कौन है?" रमेश ने हकलाते हुए पूछा।

"चंद्रावती!" नटवरलाल ने फुसफुसाते हुए कहा। "वह 200 साल पुरानी चुड़ैल है। जिसे तुमने ऊपर घुंघरू पहन कर चलते हुए सुना था। उसे शोर बिल्कुल पसंद नहीं है। और तुम लोगों ने मेरे साथ बात करके बहुत शोर कर दिया है..."

अभी नटवरलाल की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि अचानक तहखाने की सीढ़ियों के ऊपर वाले लकड़ी के दरवाज़े पर ज़ोरदार प्रहार हुआ।
धड़ाम... धड़ाम... धड़ाम!

ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत ताकतवर चीज़ दरवाज़े को तोड़ने की कोशिश कर रही हो। सीढ़ियों से नीचे एक अजीब सी लाल रंग की रोशनी आने लगी और पायल की भयानक आवाज़ अब सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी...
छम... छम... छम...

नटवरलाल (भूत) ने घबराकर कहा, "वो आ रही है! अब हम तीनों नहीं बचेंगे! भागो!!"

क्या होगा आगे?

क्या चंद्रावती चुड़ैल दरवाज़ा तोड़कर अंदर आ जाएगी? जब एक भूत खुद चुड़ैल से डर रहा है, तो रमेश और समोसा की जान कैसे बचेगी? क्या तहखाने में छिपने का कोई और रास्ता है?

जानने के लिए पढ़ें इस हॉरर-कॉमेडी कहानी का भाग 3! (जल्द आ रहा है...)

इस कहानी के बारे में (Story Summary & FAQs)

तहखाने में रमेश और समोसा को कौन मिला?

उन्हें तहखाने में 'नटवरलाल' नाम का एक भूत मिला, जो 1920 के दशक का एक थिएटर एक्टर था। वह डरावना दिखने के बावजूद स्वभाव से भुक्खड़ और डरपोक है।

क्या हवेली में सिर्फ एक ही भूत है?

नहीं, हवेली के तहखाने में नटवरलाल रहता है, लेकिन हवेली के ऊपरी हिस्से में 200 साल पुरानी एक खतरनाक चुड़ैल 'चंद्रावती' का साया है, जिससे खुद नटवरलाल भी डरता है।

कहानी का भाग 3 कब प्रकाशित होगा?

इस रोमांचक कहानी का तीसरा भाग (Part 3) जल्द ही hindistories.site पर पब्लिश किया जाएगा, जिसमें चुड़ैल चंद्रावती से उनका आमना-सामना होगा!

Comments

Also Like to Read :

धुंधला अतीत (भाग-2): हवेली का अंतिम सच और एक अधूरा रिश्ता (सच्ची घटना का अंत)

कमरे की खिड़की धड़ाम से खुली और ठंडी हवा के झोंके ने जलती हुई मोमबत्ती को बुझा दिया। दीवार पर मंडराता हुआ वह साया एक पल के लिए थमा और फिर तेजी से छत की ओर जाने वाले जीने की तरफ बढ़ा। मेरे हाथों में कंपन था, लेकिन भय पर जिज्ञासा हावी हो चुकी थी। मैं अपनी टॉर्च जलाकर उस साए के पीछे भागा। सीढ़ियों पर चढ़ते हुए मुझे किसी के दबे पांव चलने की आहट साफ सुनाई दे रही थी। जैसे ही मैं हवेली की खुली छत पर पहुंचा, सामने गंगा का शांत पाट फैला हुआ था। अस्सी घाट की बत्तियां दूर टिमटिमा रही थीं। छत के मुंडेर के पास सफेद सूती साड़ी पहने एक बुजुर्ग महिला खड़ी थी। उनके सफेद बाल हवा में उड़ रहे थे और वे कांपते हाथों से गंगा की लहरों को देख रही थीं। मैंने टॉर्च की रोशनी उनकी तरफ की, तो उन्होंने अपना चेहरा ढक लिया। उनकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक असीम वेदना थी। "टॉर्च बुझा दो, कबीर... तुम्हारी आँखों की ये चमक बिल्कुल तुम्हारे दादाजी शैलेंद्र जैसी है। मैं तुम्हें कोई नुकसान पहुँचाने नहीं आई हूँ।" उनकी आवाज में एक ऐसा अपनत्व...

मंडप का ड्रामा और असली दूल्हा! - Romantic Comedy Hindi Story (Part 3 Finale)

HindiStories.site पर आपका स्वागत है! यह हमारी सबसे चर्चित Romantic Comedy Hindi Story का तीसरा और आख़िरी भाग (Grand Finale) है। पिछले भाग में आपने देखा कि आरव और मीरा ने जब अपने प्यार का इज़हार किया, तो घरवालों ने एक बहुत बड़ा बम फोड़ दिया—मीरा की शादी परसों किसी और से तय कर दी गई है! क्या आरव अपना प्यार हार जाएगा? या मंडप में होगा कोई बड़ा धमाका? दिल थाम कर बैठिए, क्योंकि यह Love Story आपको हंसाते-हंसाते रुला देगी! एक रात, ढेरों आंसू और 'ऑपरेशन किडनैप' "यह कैसे हो सकता है? मेरी शादी परसों है और मुझे पता ही नहीं?" मीरा अपने कमरे में रो-रोकर बुरा हाल कर चुकी थी। आरव की हालत भी उससे कुछ कम नहीं थी। घरवालों ने दोनों के मोबाइल छीन लिए थे और दोनों को उनके कमरों में 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया था। रात के 2 बज रहे थे। आरव ने अपनी पुरानी अलमारी से एक डब्बा निकाला। उसमें वो सूखी हुई गुलाब की पंखुड़ियां और वो कैफे का बिल रखा था जो उनकी पहली मुलाकात की निशानी थी। उसे मीरा की वो मासूम सी हंसी याद आ रही थी, बारिश में ठिठुरना याद आ रहा था। व...

खूनी हवेली और वो 'नौटंकी' भूत: शैतान का अंत (अंतिम भाग 5) | Horror Comedy Finale

पिछले भाग में कहानी एक महा-सस्पेंस पर रुकी थी, जहाँ पाताल का 500 साल पुराना शैतान 'कंकालासुर' कहर बरपाने के लिए पूरी तरह बाहर आ चुका था। उसे हराने वाली जादुई भस्म (राख) खूनी संदूक में थी, और संदूक को खोलने की चाबी (परदादा की तांबे की अंगूठी) को हमारा भुक्खड़ समोसा 'हाजमोला' समझकर खा चुका था! अब रमेश के सामने मौत खड़ी थी और चाबी समोसा के पेट में थी। अध्याय 17: पेट में चाबी, सिर पर मौत कंकालासुर ने अपनी लाल धधकती आँखों से रमेश को घूरा और ज़ोर से हँसा। उसकी हँसी से तहखाने की बची-खुची दीवारें भी दरकने लगीं। "हा हा हा! मूर्ख इंसानों! तुम्हारी चाबी तो पेट में पच रही है। अब तुम्हें कौन बचाएगा?" रमेश ने हताश होकर नटवरलाल (भूत) की तरफ देखा, "भाई नटवरलाल! तुम तो भूत हो, दीवार के आर-पार जा सकते हो। अपना हाथ समोसा के पेट में डालकर वो अंगूठी निकाल लाओ ना!" नटवरलाल ने डरते हुए कहा, "पागल है क्या? मैं भूत हूँ, डॉक्टर नहीं! और इसके पेट में जो खतरनाक गैस बन रही है ना, उससे मेरी बची-खुची आत्मा भी पिघल जाएगी!" समोस...