पिछले भाग में आपने पढ़ा कि रमेश और समोसा हवेली के तहखाने (Basement) में फँस गए थे। अंधेरे में किसी ने रमेश का कंधा छुआ और समोसा के गाल पर जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। जैसे ही समोसा के मोबाइल की टॉर्च ब्लिंक हुई, रमेश ने देखा कि समोसा के ठीक पीछे एक भयानक चेहरा खड़ा था, और वह समोसा की आलू भुजिया खा रहा था!
अध्याय 5: भुजिया चोर भूत!
रमेश का गला सूख गया, वह चीखना चाहता था, लेकिन उसकी आवाज़ गले में ही फंस गई। उसने कांपते हुए हाथ से समोसा की शर्ट खींची और इशारे से पीछे देखने को कहा।
समोसा ने जैसे ही पीछे मुड़कर देखा, टॉर्च की रोशनी सीधे उस भूत के चेहरे पर पड़ी। कोई भी आम इंसान इस दृश्य को देखकर बेहोश हो जाता, लेकिन हमारा समोसा कोई आम इंसान नहीं था!
समोसा गुस्से से लाल होकर चिल्लाया, "ओए! तूने मेरी भुजिया क्यों खाई? एक तो थप्पड़ मारता है ऊपर से मेरा स्नैक चोरी करता है! शर्म नहीं आती इतने बड़े होकर बच्चों का खाना चुराते हुए?"
भूत, जो पिछले 150 सालों से लोगों को डरा-डरा कर हार्ट अटैक दे रहा था, समोसा की इस प्रतिक्रिया से एकदम बौखला गया। उसकी सफेद आँखों में कन्फ्यूजन (Confusion) साफ़ झलक रहा था।
अध्याय 6: 'नटवरलाल' द भूतिया एक्टर
भूत ने अपनी भारी आवाज़ में गूंजते हुए कहा और हवा में थोड़ा और ऊपर उठ गया। तहखाने का तापमान अचानक शून्य से नीचे चला गया। रमेश के दांत किटकिटाने लगे।
लेकिन समोसा ने अपनी जैकेट की ज़िप बंद करते हुए कहा, "रूह तो बाद में कांपेगी, पहले मेरे 20 रुपये निकाल! मेरी भुजिया जूठी कर दी तूने।"
भूत हवा से नीचे ज़मीन पर उतरा। उसका सारा डरावनापन गायब हो चुका था। वह एक गहरी सांस (जो कि असल में सिर्फ हवा थी) लेते हुए बोला, "यार, तुम लोग डरे क्यों नहीं? मैं 150 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ। मेरा नाम 'नटवरलाल' है। 1920 के दशक का सबसे मशहूर थिएटर एक्टर!"
रमेश, जो अब तक दीवार से चिपका हुआ था, थोड़ी हिम्मत जुटाकर बोला, "त..तो तुम भूत कैसे बने?"
नटवरलाल (भूत) ने उदास होकर बताया, "एक नाटक के दौरान मुझे मंच पर गरम-गरम समोसे खाने का सीन करना था। समोसा इतना गरम था कि मेरे गले में अटक गया और पानी की जगह मैंने गलती से केरोसिन पी लिया। बस, वहीं मेरा 'द एंड' हो गया। तब से मेरी आत्मा भूखी भटक रही है। सच कहूँ तो मैं तुम्हें डराना नहीं चाहता था, मुझे बस तुम्हारी भुजिया की खुशबू आ गई थी।"
अध्याय 7: ऊपर वाली भूतनी का खौफ
यह सब सुनकर रमेश की जान में जान आई। चलो, कम से कम यह भूत खूंखार तो नहीं है, बस भुक्खड़ है, बिल्कुल मेरे दोस्त समोसा की तरह!
रमेश ने राहत की सांस लेते हुए कहा, "चलो अच्छा है, हवेली का भूत तो अपना दोस्त बन गया। अब हमें डरने की कोई ज़रूरत नहीं।"
तभी नटवरलाल (भूत) के चेहरे की हवा उड़ गई (हालांकि वह पहले से ही भूत था, लेकिन उसका चेहरा अब खौफ से भर गया)। उसने पारले-जी का पैकेट अपनी फटी हुई जेब में छिपाया और कांपने लगा।
अध्याय 8: जब तहखाने का दरवाज़ा कांपा
रमेश और समोसा का खून जम गया।
"ऊपर कौन है?" रमेश ने हकलाते हुए पूछा।
अभी नटवरलाल की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि अचानक तहखाने की सीढ़ियों के ऊपर वाले लकड़ी के दरवाज़े पर ज़ोरदार प्रहार हुआ।
धड़ाम... धड़ाम... धड़ाम!
ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत ताकतवर चीज़ दरवाज़े को तोड़ने की कोशिश कर रही हो। सीढ़ियों से नीचे एक अजीब सी लाल रंग की रोशनी आने लगी और पायल की भयानक आवाज़ अब सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी...
छम... छम... छम...
नटवरलाल (भूत) ने घबराकर कहा, "वो आ रही है! अब हम तीनों नहीं बचेंगे! भागो!!"
क्या होगा आगे?
क्या चंद्रावती चुड़ैल दरवाज़ा तोड़कर अंदर आ जाएगी? जब एक भूत खुद चुड़ैल से डर रहा है, तो रमेश और समोसा की जान कैसे बचेगी? क्या तहखाने में छिपने का कोई और रास्ता है?
जानने के लिए पढ़ें इस हॉरर-कॉमेडी कहानी का भाग 3! (जल्द आ रहा है...)
इस कहानी के बारे में (Story Summary & FAQs)
तहखाने में रमेश और समोसा को कौन मिला?
उन्हें तहखाने में 'नटवरलाल' नाम का एक भूत मिला, जो 1920 के दशक का एक थिएटर एक्टर था। वह डरावना दिखने के बावजूद स्वभाव से भुक्खड़ और डरपोक है।
क्या हवेली में सिर्फ एक ही भूत है?
नहीं, हवेली के तहखाने में नटवरलाल रहता है, लेकिन हवेली के ऊपरी हिस्से में 200 साल पुरानी एक खतरनाक चुड़ैल 'चंद्रावती' का साया है, जिससे खुद नटवरलाल भी डरता है।
कहानी का भाग 3 कब प्रकाशित होगा?
इस रोमांचक कहानी का तीसरा भाग (Part 3) जल्द ही hindistories.site पर पब्लिश किया जाएगा, जिसमें चुड़ैल चंद्रावती से उनका आमना-सामना होगा!
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