दरवाजे खुलने की वह धीमी सी 'डिंग' की आवाज कबीर के कानों में किसी परमाणु बम के फटने जैसी गूंजी। लिफ्ट की पीली रोशनी से बाहर की चमकदार, दूधिया रोशनी सीधे उसकी आंखों पर पड़ी। कबीर ने सकपकाते हुए अपनी पलकें झपकाईं। लेकिन सामने का नजारा देखकर उसके शरीर का सारा खून जैसे जम गया। जापानी डेलिगेशन के प्रमुख, मिस्टर तनाका, अपनी सोने के फ्रेम वाली ऐनक को नाक पर थोड़ा नीचे खिसकाए, बेहद गंभीर मुद्रा में खड़े थे। उनके बगल में कंपनी के प्रेसिडेंट अखिलेश शर्मा खड़े थे, जिनका चेहरा गुस्से और सदमे के कारण बिल्कुल बैंगनी हो चुका था। उनके ठीक पीछे कबीर के ही विभाग के तीन जूनियर कर्मचारी खड़े थे, जिनके मुंह खुले के खुले रह गए थे और आंखों में एक अजीब सी शरारत तैर रही थी।
स्थिति सचमुच बेहद शर्मनाक थी। कबीर फर्श पर पीठ के बल लेटा हुआ था। उसकी महंगी सफेद शर्ट के सारे बटन खुले हुए थे, जिससे उसका कसरती सीना साफ नजर आ रहा था। नैना उसके ऊपर इस तरह गिरी हुई थी कि उसकी कुर्ती का एक सिरा कबीर की कलाई घड़ी के बकल में उलझा हुआ था। दोनों के बाल बिखरे हुए थे, गालों पर पसीना था, और दोनों के चेहरे लाल पड़ चुके थे। ऐसा लग रहा था मानो वे लिफ्ट के अंदर किसी बेहद निजी और तीव्र क्षण के बीच में थे, जिसे अचानक पूरी दुनिया ने देख लिया हो।
"कबीर..." अखिलेश शर्मा की आवाज इतनी भारी और ठंडी थी कि लिफ्ट के अंदर का तापमान अचानक शून्य से नीचे गिरता हुआ महसूस हुआ। "यह... यह क्या बकवास चल रही है यहाँ?"
कबीर ने तुरंत उठने की कोशिश की, लेकिन नैना की कुर्ती का धागा अभी भी उसकी घड़ी में फंसा हुआ था। जैसे ही उसने झटका दिया, एक तेज 'चर्र' की आवाज आई। नैना की कुर्ती का कॉलर थोड़ा और फट गया, जिससे उसकी सुंदर कॉलरबोन और त्वचा और अधिक उजागर हो गई। नैना के मुंह से एक घबराई हुई चीख निकली और उसने तुरंत अपनी दोनों हथेलियां कबीर की नंगी छाती पर टिका दीं ताकि वह खुद को संभाल सके। इस स्पर्श से कबीर के शरीर में बिजली की एक लहर दौड़ गई, लेकिन बाहर खड़े लोगों के लिए यह नजारा किसी जलती आग में घी डालने जैसा था।
"ओह! अति सुंदर... लेकिन अत्यंत अपरंपरागत!" मिस्टर तनाका ने अपनी जापानी शैली में सिर झुकाते हुए बेहद धीमी आवाज में कहा। उनके साथ आए अन्य जापानी अधिकारियों ने भी आपस में कुछ फुसफुसाया और अपनी डायरियों में कुछ नोट करने लगे।
नैना ने किसी तरह अपनी कुर्ती को कबीर की घड़ी से खींचा, जिससे उसका थोड़ा सा हिस्सा और फट गया। वह लड़खड़ाते हुए खड़ी हुई और अपनी फटी हुई कुर्ती को दोनों हाथों से ढकने की कोशिश करने लगी। कबीर भी जल्दी से उठ खड़ा हुआ। उसने अपनी शर्ट के खुले हुए हिस्सों को आपस में जोड़ने की नाकाम कोशिश की, लेकिन उसके बटन टूटकर लिफ्ट के फर्श पर बिखर चुके थे।
"सर... शर्मा सर, मैं समझा सकता हूँ। यह वैसा बिल्कुल नहीं है जैसा आप सोच रहे हैं। यह सिर्फ एक दुर्घटना थी... हम लिफ्ट में फंस गए थे और..." कबीर ने हांफते हुए सफाई देनी चाही।
"मेरे केबिन में आओ। दोनों के दोनों। अभी के अभी!" अखिलेश शर्मा ने कड़क आवाज में कहा और बिना पीछे मुड़े अपने केबिन की तरफ बढ़ गए। जापानी क्लाइंट्स को एक अन्य मैनेजर तुरंत कॉन्फ्रेंस रूम की तरफ ले गया, लेकिन जाते-जाते वे दोनों कबीर और नैना को ऐसी नजरों से देख रहे थे मानो उन्होंने भारत की सबसे बड़ी एडवरटाइजिंग एजेंसी में कोई नया 'लाइव शो' देख लिया हो।
केबिन का कोर्ट और मामा का गुस्सा
अखिलेश शर्मा के आलीशान केबिन का दरवाजा जैसे ही बंद हुआ, अंदर का सन्नाटा और गहरा हो गया। कबीर अपनी फटी हुई शर्ट को अपने कोट से ढकने की कोशिश कर रहा था, जिसे उसने फर्श से उठा लिया था। नैना एक कोने में खड़ी थी, उसका चेहरा शर्म और गुस्से से लाल था। वह लगातार अपनी कुर्ती के फटे हिस्से को छुपाने के लिए अपनी फाइल्स को अपनी छाती से सटाए खड़ी थी।
अखिलेश शर्मा अपनी विशाल लेदर की कुर्सी पर बैठे। उन्होंने अपनी उंगलियों को आपस में फंसाया और कबीर को घूरने लगे। "कबीर, तुम मेरी कंपनी के सबसे भरोसेमंद और अनुशासित मैनेजर हो। कम से कम आज सुबह तक तो थे। लेकिन आज तुमने जो तमाशा किया है, उसकी कोई माफी नहीं है। वॉशरुम से आ रही अजीब आवाजों की शिकायतें मेरे पास पहले ही आ चुकी थीं, और अब यह लिफ्ट का कांड?"
"मामा जी! मेरी बात तो सुनिए!" नैना ने बीच में टोकते हुए कहा।
"चुप रहो नैना!" अखिलेश चिल्लाए। "मैंने तुम्हें यहाँ एक फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर मौका दिया था क्योंकि तुम्हारी मां ने मुझसे सिफारिश की थी। लेकिन तुम यहाँ आकर मेरे ही सबसे काबिल मैनेजर के कपड़े फाड़ रही हो? और कबीर, तुम? जापानी क्लाइंट्स के सामने हमारी क्या इज्जत रह गई? वे बहुत पारंपरिक लोग हैं। वे व्यावसायिक नैतिकता और अनुशासन को सबसे ऊपर रखते हैं।"
"सर, वास्तव में लिफ्ट ने अचानक झटका खाया था," कबीर ने अपनी आवाज को यथासंभव शांत रखते हुए कहा। "हम नीचे गिर रहे थे, और खुद को बचाने के प्रयास में हम दोनों आपस में टकरा गए। हमारे बीच ऐसा कुछ भी नहीं है जो व्यावसायिक मानदंडों के खिलाफ हो। मैं आपको अपनी नौकरी की कसम खाकर कह सकता हूँ।"
अखिलेश शर्मा ने गहरी सांस ली। वे जानते थे कि कबीर झूठ नहीं बोल रहा है, क्योंकि कबीर का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा से बेदाग रहा था। लेकिन बाहर जो संदेश गया था, उसे बदलना आसान नहीं था। जापानी क्लाइंट्स इस प्रोजेक्ट के लिए पचास मिलियन डॉलर का निवेश करने वाले थे। अगर वे इस घटना को 'कैजुअल और अनप्रोफेशनल' मानकर पीछे हट जाते, तो कंपनी बर्बाद हो जाती।
तभी केबिन के इंटरकॉम की घंटी बजी। अखिलेश ने फोन उठाया। "हाँ? क्या? मिस्टर तनाका क्या कह रहे हैं?"
कबीर और नैना ने सांसें रोककर अखिलेश के चेहरे के बदलते हाव-भाव देखे। अखिलेश के चेहरे पर पहले हैरानी, फिर थोड़ी राहत और अंत में एक बेहद जटिल मुस्कान उभरी। उन्होंने फोन रखा और दोनों की तरफ देखा।
"तुम्हारी किस्मत अच्छी है... या शायद बहुत ज्यादा खराब," अखिलेश ने कबीर की तरफ देखते हुए कहा। "मिस्टर तनाका का मानना है कि जो कुछ भी उन्होंने लिफ्ट में देखा, वह कोई बदतमीजी नहीं थी। वे समझते हैं कि तुम दोनों के बीच एक 'असाधारण और रचनात्मक कशमकश' है। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी के लिए जो नया एनर्जी ड्रिंक ब्रांड हम लॉन्च कर रहे हैं, उसका विज्ञापन केवल वही लोग बना सकते हैं जिनमें खुद इतनी तीव्र और अनियंत्रित ऊर्जा हो।"
कबीर ने राहत की सांस लेनी चाही, लेकिन अखिलेश ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया। "रुको। उन्होंने एक शर्त रखी है। वे चाहते हैं कि इस ब्रांड का पूरा क्रिएटिव कैंपेन कबीर और नैना मिलकर तैयार करें। और वे कल सुबह ठीक नौ बजे इसका फाइनल प्रेजेंटेशन देखना चाहते हैं। अगर कल का प्रेजेंटेशन उन्हें पसंद आया, तो कबीर, तुम्हें तुम्हारा मनचाहा प्रमोशन मिलेगा, और नैना, तुम्हें इस कंपनी में परमानेंट पार्टनरशिप मिलेगी। लेकिन..."
अखिलेश की आंखों में एक खतरनाक चमक थी। "...अगर कल सुबह तक काम पूरा नहीं हुआ, या प्रेजेंटेशन में कोई भी कमी रही, तो कबीर, तुम इसी वक्त फायर हो। और नैना, मैं तुम्हारी मां को फोन करके बताऊंगा कि तुमने यहाँ क्या गुल खिलाए हैं, जिसके बाद तुम्हारा करियर इस शहर में तो क्या, पूरे देश में खत्म हो जाएगा।"
एक ही छत के नीचे दो कट्टर दुश्मन
दोपहर के तीन बज चुके थे। कबीर ने अपने केबिन में जाकर अपनी एक स्पेयर शर्ट पहनी, जो भाग्य से उसके अलमारी में रखी थी। काम का दबाव इतना ज्यादा था कि सोचने-समझने का वक्त ही नहीं था। जापानी क्लाइंट्स के लिए एक पूरी नई विज्ञापन रणनीति, टैगलाइन, और विजुअल डिजाइन तैयार करना चौबीस घंटे से भी कम समय में लगभग असंभव काम था। वह भी तब, जब उसका पार्टनर कोई और नहीं, बल्कि वह लड़की हो जिससे उसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी शर्मिंदगी मिली थी।
शाम के सात बज गए, लेकिन काम का ढांचा भी तैयार नहीं हो पाया था। ऑफिस खाली होने लगा था। एयर कंडीशनर की ठंडी हवा में भी कबीर के माथे पर पसीना आ रहा था। तभी नैना उसके केबिन में दाखिल हुई। उसने अब ऑफिस की ही एक महिला कर्मचारी से मांगकर एक बड़ी ओवरसाइज्ड टी-शर्ट पहन रखी थी, जो उस पर काफी ढीली ढाली और अजीब लग रही थी, लेकिन उसके बिखरे बालों और मासूम चेहरे के साथ वह बेहद आकर्षक लग रही थी।
"हम यहाँ ऑफिस में बैठकर यह काम नहीं कर सकते," नैना ने अपनी फाइल्स टेबल पर पटकते हुए कहा। "यहाँ हर पांच मिनट में कोई न कोई झांककर हमें ऐसे देख रहा है जैसे हम किसी चिड़ियाघर के जानवर हों। वॉशरुम वाली अफवाह पूरे ऑफिस में फैल चुकी है। लोग कह रहे हैं कि हमने ऑफिस के टॉयलेट में... खैर, आप समझ रहे हैं ना?"
कबीर ने अपना सिर पकड़ लिया। "मुझे पता है। मेरे जूनियर्स मुझसे पूछ रहे थे कि सर, ब्लीच स्प्रे का कोई नया इस्तेमाल शुरू किया है क्या? यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है, नैना!"
"ओह प्लीज! चिल्लाइए मत। गलती आपकी भी थी। अगर आप इतने नाजुक न होते, तो वह कॉफी आपके कोट पर गिरती ही नहीं," नैना ने पलटवार किया। "अब बहस बंद कीजिए। हमें पूरी रात काम करना होगा। मेरे अपार्टमेंट में पेंटिंग का काम चल रहा है, वहाँ बदबू और शोर है। इसलिए हमारे पास केवल एक ही विकल्प है—आपका घर।"
"मेरा घर?" कबीर अपनी कुर्सी से उछल पड़ा। "बिल्कुल नहीं! मैं एक कुंवारा मर्द हूँ। मैं अपने बेहद साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर में तुम्हारे जैसी तूफानी और बिखरी हुई लड़की को एक रात के लिए भी नहीं रख सकता। मेरी सोसाइटी के लोग क्या सोचेंगे?"
"वे वही सोचेंगे जो सोचना चाहते हैं। लेकिन अगर कल सुबह प्रेजेंटेशन तैयार नहीं हुआ, तो आपकी सोसाइटी के लोग आपको बेरोजगार और बेघर भी देखेंगे," नैना ने अपनी भौहें चढ़ाते हुए कहा।
कबीर के पास कोई जवाब नहीं था। बात कड़वी थी, लेकिन सच थी। उसने भारी मन से अपनी कार की चाबी उठाई। "ठीक है। लेकिन मेरे घर में कुछ नियम हैं। तुम किसी भी चीज को बिना पूछे हाथ नहीं लगाओगी। पैरों में चप्पल पहनकर घर के अंदर नहीं आओगी। और सबसे बड़ी बात—तुम मुझसे कम से कम पांच फीट की दूरी बनाकर रखोगी।"
नैना ने अपनी आंखें घुमाईं और कहा, "मुझे आपकी हड्डियों के ढांचे से चिपकने का कोई शौक नहीं है, मिस्टर कड़क बॉस! चलिए अब।"
बेडरूम का बवाल और गीली रात
रात के साढे नौ बजे दोनों कबीर के फ्लैट पर पहुंचे। कबीर का अपार्टमेंट वैसा ही था जैसा वह खुद था—हर चीज अपनी जगह पर बिल्कुल सटीक। सफेद सोफा, साफ-सुथरा किचन, कांच के टेबल पर रखी हुई किताबें बिल्कुल समानांतर रेखा में सजी हुई थीं।
नैना ने जैसे ही अंदर कदम रखा, उसने राहत की सांस ली और सीधे सोफे पर कूद गई। "वाह! आपका घर तो किसी म्यूजियम जैसा है। यहाँ इंसान रहते हैं या रोबोट?" उसने कहते ही अपने सैंडल उतारकर सीधे लिविंग रूम के बीचों-बीच फेंक दिए।
"नियम नंबर एक!" कबीर चिल्लाया और तुरंत नीचे झुककर उसके सैंडल्स को उठाकर कोने में रैक पर रखा। "मैंने कहा था ना, चीजें अपनी जगह पर रहनी चाहिए। अब सीधे हाथ-मुंह धोकर काम पर बैठो।"
काम शुरू हुआ। कबीर अपने लैपटॉप पर ब्रांड की रणनीति लिख रहा था, और नैना फर्श पर बैठकर अपने आईपैड पर स्केच बना रही थी। शुरुआत में दोनों के बीच केवल काम की बातें हो रही थीं, लेकिन जैसे-जैसे रात गहराती गई, उनके बीच का तनाव कम होने लगा। कबीर ने देखा कि जब नैना काम पर ध्यान केंद्रित करती थी, तो उसकी आंखों की चमक बिल्कुल अलग होती थी। वह सचमुच एक बेहद प्रतिभाशाली डिजाइनर थी। उसके हाथ इतनी तेजी से चल रहे थे मानो वह हवा में रंग भर रही हो।
रात के करीब एक बजे कबीर ने दो कप कड़क ब्लैक कॉफी बनाई। "यह लो। बिना चीनी की है। तुम्हारी उस मीठी चॉकलेट पेस्ट्री का हिसाब बराबर करने के लिए।"
नैना ने मुस्कुराकर कप ले लिया। "थैंक यू। वैसे, आप जितने खडूस दिखते हैं, उतने हैं नहीं। लिफ्ट में जब मुझे पैनिक अटैक आ रहा था, तब आपने जिस तरह मुझे संभाला... उसके लिए शुक्रिया।"
कबीर ने कॉफी की चुस्की ली। "मुझे बंद जगहों से डरने वाले लोगों का अनुभव है। मेरी छोटी बहन को भी क्लॉस्ट्रोफोबिया है। इसलिए मैं समझ सकता हूँ कि उस वक्त तुम्हारे दिमाग में क्या चल रहा होगा।"
"तो आपके अंदर एक इंसान भी छुपा हुआ है!" नैना ने छेड़ते हुए कहा।
"हंसो मत। काम पर ध्यान दो," कबीर ने थोड़ा शर्माते हुए कहा और अपना ध्यान वापस लैपटॉप पर लगा दिया।
तभी अचानक, बाहर तेज गड़गड़ाहट हुई और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। हवा इतनी तेज थी कि कबीर के लिविंग रूम की खिड़की का एक पल्ला जोर से खुला और बारिश की बौछारें सीधे नैना के स्केचबुक और आईपैड पर गिरने लगीं।
"ओह माय गॉड! मेरे स्केच गीले हो रहे हैं!" नैना चिल्लाई और खिड़की बंद करने के लिए दौड़ी।
कबीर भी उसकी मदद के लिए भागा। दोनों एक साथ खिड़की के पास पहुंचे। हवा का दबाव इतना ज्यादा था कि कबीर को खिड़की बंद करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ी। इसी बीच, बारिश का पानी दोनों को पूरी तरह भिगो चुका था। नैना की पतली ओवरसाइज्ड टी-शर्ट पानी से भीगकर उसके शरीर से बिल्कुल चिपक गई, जिससे उसके शरीर के घुमाव और उसके अंदर पहने हुए अंतःवस्त्र का रंग साफ झलकने लगा।
कबीर ने जैसे ही खिड़की बंद की और पीछे मुड़ा, उसकी सांसें वहीं थम गईं। नैना के गीले बाल उसके चेहरे और गर्दन पर चिपके हुए थे। पानी की बूंदें उसकी कॉलरबोन से होते हुए उसकी छाती के बीच के गहरे हिस्से में उतर रही थीं। पीली लाइट में वह इस समय अविश्वसनीय रूप से कामुक लग रही थी।
नैना ने भी कबीर की तरफ देखा। कबीर की शर्ट भी गीली होकर उसकी चौड़ी छाती से चिपकी हुई थी। दोनों के बीच की दूरी अचानक खत्म हो गई थी। हवा में केवल बारिश की खुशबू और उन दोनों की गर्म सांसों की आवाज थी।
"कबीर..." नैना की आवाज में एक अजीब सी थरथराहट थी।
कबीर ने खुद पर से नियंत्रण खोना शुरू कर दिया था। उसने अपने हाथ धीरे से नैना की गीली कमर पर रखे। नैना के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई, लेकिन उसने खुद को पीछे नहीं खींचा। इसके विपरीत, उसने अपनी नजरें कबीर के होंठों पर टिका दीं। कबीर धीरे-धीरे नीचे झुका। दोनों के होंठ महज कुछ मिलीमीटर की दूरी पर थे। कबीर को नैना की सांसों की महक और उसके शरीर की गर्मी मदहोश कर रही थी।
ठीक उसी क्षण, कबीर के फ्लैट के मुख्य दरवाजे का लॉक घूमने की आवाज आई।
दोनों झटके से एक-दूसरे से अलग हुए। कबीर ने घबराकर दरवाजे की तरफ देखा। दरवाजा खुला और सामने एक बेहद खूबसूरत, आधुनिक और गुस्से से लाल चेहरे वाली लड़की खड़ी थी। उसके हाथ में कबीर के घर की डुप्लीकेट चाबी थी।
वह कोई और नहीं, बल्कि कबीर की एक्स-फियांसी (पूर्व मंगेतर) और अखिलेश शर्मा की इकलौती बेटी, तान्या थी!
तान्या ने अंदर का नजारा देखा—कबीर और नैना दोनों पूरी तरह से गीले थे, लिविंग रूम में कपड़े बिखरे पड़े थे, और दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे।
"कबीर! तो पापा जो कह रहे थे, वह सच था? तुम इस मामूली लड़की के साथ मेरे पीठ पीछे यह सब कर रहे हो?" तान्या की आवाज पूरे अपार्टमेंट में गूंज उठी।
कबीर के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। अब न सिर्फ उसकी नौकरी, बल्कि उसका पूरा व्यक्तिगत जीवन एक ऐसे तूफान में फंस चुका था जिससे निकलना नामुमकिन लग रहा था।
इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला मोड़ अभी आना बाकी है — पढ़िए Part 3, जल्द आ रहा है hindistories.site पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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क्या कबीर की नौकरी बच पाएगी?
जापानी क्लाइंट्स ने कबीर और नैना को कल सुबह तक का समय दिया है। यदि वे दोनों मिलकर एक शानदार क्रिएटिव कैंपेन पेश कर देते हैं, तो कबीर की नौकरी न सिर्फ बच जाएगी बल्कि उसे प्रमोशन भी मिलेगा। इसका पूरा सच कहानी के अगले भाग (Part 3) में सामने आएगा।
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कबीर और नैना के बीच क्या रिश्ता है?
शुरुआत में दोनों एक-दूसरे को नापसंद करते थे और उनके विचार बिल्कुल अलग थे। लेकिन लगातार साथ काम करने और मजबूरी में एक साथ रात बिताने के दौरान उनके बीच एक अनकही कशिश और आकर्षण पैदा होने लगा है।
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तान्या कौन है और वह अचानक कबीर के घर क्यों आई?
तान्या कबीर की पूर्व मंगेतर (Ex-Fiancee) है और कंपनी के प्रेसिडेंट अखिलेश शर्मा की बेटी है। उसे जब ऑफिस के कर्मचारियों से कबीर और नैना के लिफ्ट वाले कांड की बात पता चली, तो वह सच जानने के लिए सीधे कबीर के फ्लैट पर पहुंच गई।
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इस कहानी का तीसरा भाग (Part 3) कब आएगा?
कबीर, नैना और तान्या के बीच खड़े हुए इस नए त्रिकोण और कल सुबह के महत्वपूर्ण प्रेजेंटेशन का ड्रामा देखने के लिए आपको कहानी का तीसरा भाग पढ़ना होगा, जो बहुत जल्द hindistories.site पर उपलब्ध होगा।
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