कबीर की सांसें इस वक्त उसकी छाती में ही जम सी गई थीं। उसके ठीक सामने, महज कुछ इंच की दूरी पर नैना खड़ी थी—या यूं कहें कि वह कबीर के ऊपर ही गिरने वाली थी। लिफ्ट की पीली, मद्धम रोशनी में नैना की सांसों की गर्माहट कबीर के चेहरे पर साफ महसूस हो रही थी। कबीर के महंगे सफ़ेद सूट पर इस समय लाल वाइन और चॉकलेट सिरप के ऐसे निशान थे, जैसे किसी ने वहां कोई युद्ध लड़ा हो। सबसे बुरी बात यह थी कि नैना की रेशमी कुर्ती का एक हिस्सा कबीर की कलाई घड़ी में बुरी तरह उलझ चुका था। कबीर ने जैसे ही खुद को पीछे खींचने की कोशिश की, नैना के मुंह से एक दबी हुई चीख निकली, "अरे! थोड़ा धीरे... आप मेरी कुर्ती फाड़ेंगे क्या?"
कबीर ने अपनी आंखें बंद कर लीं और खुद को शांत रखने की कोशिश की। वह शहर की सबसे बड़ी एडवरटाइजिंग एजेंसी का सबसे कड़क, समय का पाबंद और साफ-सफाई का दीवाना सीनियर मैनेजर था। उसकी जिंदगी में हर चीज एक तय पटरी पर चलती थी। लेकिन आज सुबह से ही उसकी जिंदगी की पटरी पर कोई पागल ट्रेन दौड़ रही थी, और उस ट्रेन की ड्राइवर कोई और नहीं, बल्कि उसके सामने खड़ी यह बेहद खूबसूरत लेकिन उतनी ही बिखरी हुई लड़की नैना थी।
मुलाकात या आफ़त?
कहानी की शुरुआत ठीक दो घंटे पहले हुई थी। कबीर सुबह के ठीक पौने नौ बजे अपनी चमचमाती कार से ऑफिस पहुंचा था। आज उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था। जापानी क्लाइंट्स के सामने उसे एक मल्टी-मिलियन डॉलर का प्रेजेंटेशन देना था। अगर यह डील पक्की हो जाती, तो कबीर का प्रमोशन तय था। उसने अपनी उंगलियों से अपनी क्रीज-लेस पैंट को थोड़ा ठीक किया, बालों पर हाथ फेरा और पूरी तरह से तैयार होकर कंपनी के चमचमाते हुए कांच के मुख्य दरवाजे से अंदर कदम रखा।
ठीक उसी वक्त, दूसरी तरफ से नैना भागती हुई आ रही थी। नैना एक फ्रीलांस ग्राफिक डिजाइनर थी, जिसे आज आखिरी मौके पर प्रेजेंटेशन के कुछ विजुअल्स डिलीवर करने के लिए बुलाया गया था। नैना का जीवन कबीर से बिल्कुल उलट था। वह अलार्म बजने के आधे घंटे बाद सोकर उठती थी, उसकी चप्पलें कभी एक साथ नहीं मिलती थीं, और उसके बैग में हमेशा कुछ न कुछ ऐसा होता था जो कभी भी गिरकर तमाशा बना सकता था। आज भी उसके एक हाथ में एक बड़ा सा कैनवस बोर्ड था, दूसरे हाथ में पिघलती हुई चॉकलेट पेस्ट्री का डिब्बा, और बगल में दबा हुआ था एक बड़ा सा कॉफी का मग।
"हटिए! सामने से हटिए प्लीज!" नैना चिल्लाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
जैसे ही कबीर ने मुड़कर देखा, उसे लगा जैसे कोई चक्रवात उसकी तरफ बढ़ रहा हो। अगले ही पल, दोनों के बीच एक भयानक टक्कर हुई। कबीर का पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। नैना के हाथ से छूटी हुई गरम कॉफी कबीर के चेहरे और सफ़ेद शर्ट पर जा गिरी, और उस चॉकलेट पेस्ट्री ने सीधे कबीर के महंगे कोट पर लैंडिंग की। नैना खुद को संभाल नहीं पाई और सीधे कबीर के ऊपर जा गिरी।
लॉबी में सन्नाटा छा गया। रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने अपना मुंह हाथ से ढक लिया। कबीर, जो ऑफिस में अपनी अनुशासनप्रियता के लिए जाना जाता था, इस समय जमीन पर चित पड़ा था, और उसके ऊपर एक अनजान लड़की चॉकलेट और कॉफी से लथपथ होकर उसकी आंखों में देख रही थी।
नैना ने घबराकर कबीर के सीने पर हाथ रखा और कहा, "ओह माय गॉड! आई एम सो सॉरी! क्या आप ठीक हैं?"
कबीर ने गुस्से से लाल होते हुए अपनी आंखें खोलीं। उसने अपने सीने पर रखे नैना के हाथ को देखा और फिर उसकी आंखों में झांका। गुस्सा तो बहुत था, लेकिन एक पल के लिए वह नैना की बड़ी-बड़ी, हिरनी जैसी आंखों में खो सा गया। पर यह अहसास सिर्फ एक सेकंड का था। अगले ही पल उसे याद आया कि उसके पास सिर्फ पंद्रह मिनट बचे थे।
"अपने हाथ मुझसे दूर रखिए!" कबीर लगभग फुसफुसाते हुए चिल्लाया। "और मेरे ऊपर से उठने का कष्ट करेंगी आप?"
बाथरूम का बवाल और अजीब आवाजें
नैना झटके से उठ खड़ी हुई और लगातार माफी मांगने लगी। "मुझे माफ कर दीजिए, सच में! मुझे देर हो रही थी और मेरा ध्यान नहीं गया। मैं इसे साफ कर देती हूं।" उसने अपने बैग से एक साधारण सा टिशू पेपर निकाला और कबीर के कोट पर रगड़ने लगी, जिससे वह चॉकलेट दाग और ज्यादा फैल गया।
"बस! रुक जाइए!" कबीर ने उसका हाथ झटकते हुए कहा। "आप मेरी मदद बिल्कुल मत कीजिए। आपने पहले ही मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन बर्बाद कर दिया है। जानते हैं इस कोट की कीमत क्या है?"
"जो भी हो, पर आपकी इस बदतमीजी से महंगी तो नहीं होगी!" नैना ने भी अब अपनी भौहें सिकोड़ते हुए कहा। आखिर गलती उसकी थी, लेकिन कबीर का यह रूखा बर्ताव उसे भी अखर गया था।
कबीर के पास बहस करने का समय नहीं था। वह तुरंत भागते हुए पुरुषों के वॉशरुम की तरफ बढ़ा। नैना भी उसके पीछे-पीछे दौड़ पड़ी, क्योंकि उसका कैनवस बोर्ड और कुछ जरूरी फाइल्स भी कबीर के कोट के साथ चिपक गई थीं। कबीर जैसे ही वॉशरुम में घुसा और आईने में अपना चेहरा देखा, उसका दिल बैठ गया। उसकी शानदार सफेद शर्ट अब किसी पेंटर के कैनवस जैसी दिख रही थी।
तभी वॉशरुम का दरवाजा खुला और नैना अंदर आ गई।
"तुम पागल हो क्या? यह पुरुषों का टॉयलेट है! बाहर निकलो!" कबीर ने चिल्लाते हुए कहा।
"देखिए, चिल्लाइए मत। आपके पास कोई और शर्ट नहीं है और आपका प्रेजेंटेशन दस मिनट में है। मेरे बैग में एक ब्लीच स्प्रे और एक साफ कपड़ा है। अगर आप सीधे खड़े रहें, तो मैं इसे थोड़ा ठीक कर सकती हूं," नैना ने अधिकार भरे लहजे में कहा।
कबीर ने घड़ी देखी। उसके पास सचमुच कोई रास्ता नहीं था। उसने गहरी सांस ली और कहा, "ठीक है। जल्दी करो।"
नैना ने अपनी जीन्स की जेब से स्प्रे निकाला। वह कबीर के बेहद करीब आई। कबीर को उसके बालों से चमेली और हल्की सी कॉफी की खुशबू आ रही थी। नैना ने कबीर के कोट को उतारा और उसकी शर्ट पर स्प्रे करना शुरू किया। दाग जिद्दी था, इसलिए नैना को कबीर की छाती के पास कपड़े को जोर से रगड़ना पड़ रहा था।
"आह! थोड़ा धीरे करो, दर्द हो रहा है!" कबीर के मुंह से निकला।
"अरे, अगर दबाव नहीं बनाऊंगी तो यह छूटेगा कैसे? थोड़ा सहयोग कीजिए ना!" नैना ने हांफते हुए कहा।
"लेकिन तुम बहुत ज्यादा अंदर तक रगड़ रही हो... मुझे अजीब लग रहा है," कबीर ने फुसफुसाते हुए कहा, उसका चेहरा लाल हो रहा था।
"शांत रहिए कबीर जी! बस थोड़ा सा और... हां, अब यह बाहर आ रहा है। थोड़ा और ऊपर होने दीजिए..." नैना ने कबीर के कॉलर को खींचते हुए कहा।
उसी वक्त वॉशरुम के बाहर से कंपनी के दो जूनियर कर्मचारी गुजर रहे थे। उन्होंने जब अंदर से आ रही ऐसी आवाजें सुनीं, तो उनके पैर वहीं ठिठक गए।
"यार, अंदर कबीर सर के साथ कोई है क्या? यह कैसी आवाजें आ रही हैं?" एक ने फुसफुसाकर पूछा।
"लगता है सर आज प्रेजेंटेशन से पहले ही किसी के साथ 'पर्सनल डील' फाइनल कर रहे हैं!" दूसरे ने हंसते हुए जवाब दिया।
जब कबीर को अहसास हुआ कि बाहर कोई है और वे क्या सोच रहे होंगे, तो उसने तुरंत नैना को पीछे धकेला। "बंद करो यह सब! मुझे लगता है कि मुझे ऐसे ही जाना होगा।" उसने अपना कोट वापस पहना, जिससे शर्ट के दाग थोड़े छिप गए, लेकिन पूरी तरह नहीं।
लिफ्ट में कैद दो विरोधी दिल
कबीर वॉशरुम से बाहर निकला और सीधे लिफ्ट की तरफ भागा। नैना भी अपनी फाइल्स लेकर उसके पीछे दौड़ी। दोनों जैसे ही एग्जीक्यूटिव लिफ्ट में घुसे, कबीर ने राहत की सांस ली। लेकिन वह राहत बहुत कम समय के लिए थी। नैना ने भी उसी लिफ्ट में कदम रख दिया था।
"तुम मेरा पीछा क्यों कर रही हो?" कबीर ने चिढ़कर पूछा।
"मैं आपका पीछा नहीं कर रही हूं। मुझे भी चौदहवीं मंजिल पर जाना है, क्लाइंट्स के पास," नैना ने मुंह बनाते हुए कहा।
कबीर ने गुस्से में लिफ्ट का बटन दबाया। लिफ्ट ऊपर उठने लगी। सन्नाटा इतना गहरा था कि दोनों को एक-दूसरे की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी। कबीर बार-बार अपनी कलाई घड़ी देख रहा था। अचानक, एक तेज झटके के साथ लिफ्ट रुकी।
ऊपर लगी लाइटें टिमटिमाईं और पूरी तरह बंद हो गईं। केवल एक हल्की आपातकालीन पीली लाइट जल उठी। लिफ्ट सातवीं और आठवीं मंजिल के बीच में फंस चुकी थी।
"यह क्या हुआ?" नैना घबराकर चिल्लाई।
"ओह नहीं! ऐसा आज ही होना था!" कबीर ने घबराकर इमरजेंसी अलार्म का बटन दबाया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उसने अपना फोन निकाला, पर लिफ्ट के अंदर कोई नेटवर्क नहीं था।
समय तेजी से निकल रहा था। कबीर का प्रेजेंटेशन शुरू होने में केवल पांच मिनट बचे थे। वह बेचैनी से लिफ्ट के दरवाजे को पीटने लगा। "कोई है बाहर? मदद कीजिए! हम अंदर फंसे हैं!"
नैना एक कोने में बैठ गई। उसे बंद जगहों से थोड़ा डर लगता था। "कबीर... मुझे लगता है कि यहां हवा कम हो रही है," उसने घबराते हुए कहा।
कबीर ने पीछे मुड़कर देखा। नैना का चेहरा पीला पड़ रहा था और उसे पसीना आ रहा था। कबीर का सारा गुस्सा एक पल में गायब हो गया। वह उसके पास गया और उसके घुटनों के बल बैठ गया। "शांत रहो। कुछ नहीं होगा। यह एक आधुनिक लिफ्ट है, इसका वेंटिलेशन सिस्टम काम कर रहा है। बस लंबी सांसें लो।"
"मुझे... मुझे बहुत गर्मी लग रही है," नैना ने अपनी कुर्ती के कॉलर को हिलाते हुए कहा।
कबीर ने अपना कोट उतारा और उसे एक तरफ रख दिया। उसने अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए। "हाँ, यहाँ थोड़ी गर्मी तो है। तुम अपनी कुर्ती के बटन थोड़े ढीले कर सकती हो, मैं उधर देख लेता हूँ।"
नैना ने संकोच करते हुए अपनी गर्दन के पास के बटन खोले। दोनों चुपचाप बैठ गए। धीरे-धीरे उनके बीच की कड़वाहट कम होने लगी।
"वैसे... मुझे सच में दुख है," नैना ने धीरे से कहा। "मैंने आपका इतना बड़ा दिन खराब कर दिया।"
कबीर ने उसे देखा। पीली रोशनी में नैना का चेहरा बेहद मासूम और आकर्षक लग रहा था। कबीर के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आई। "कोई बात नहीं। शायद किस्मत को आज मेरी बेइज्जती ही मंजूर थी। वैसे, तुम्हारी कॉफी काफी कड़क थी।"
नैना हंस पड़ी। "वह तो मैं हूँ ही। कड़क और अनप्रेडिक्टेबल।"
एक गलत कदम और सबसे बड़ा धमाका
दोनों के बीच का माहौल अब काफी हल्का हो चुका था। वे दोनों फर्श पर टिककर बैठ गए और बातें करने लगे। कबीर को महसूस हुआ कि नैना जितनी लापरवाह दिखती है, दिल की उतनी ही साफ और सुलझी हुई है। वहीं नैना को लगा कि कबीर जितना सख्त बाहर से दिखता है, अंदर से उतना ही परवाह करने वाला इंसान है।
अचानक, लिफ्ट ने एक जोरदार झटका लिया। ऐसा लगा जैसे वह कुछ फीट नीचे गिर गई हो।
"बचाओ!" नैना चिल्लाई और डर के मारे सीधे कबीर की तरफ लपकी।
कबीर ने उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन झटके के कारण उसका खुद का संतुलन बिगड़ गया। कबीर पीछे की तरफ गिरा और नैना सीधे उसके ऊपर आ गिरी। इस अफरा-तफरी में नैना का हाथ कबीर के शर्ट के खुले बटनों के अंदर चला गया, और उसकी कुर्ती का एक धागा कबीर की मेटल की घड़ी में बुरी तरह फंस गया।
जब लिफ्ट शांत हुई, तो दोनों की हालत देखने लायक थी। कबीर जमीन पर लेटा हुआ था, उसकी शर्ट पूरी तरह खुल चुकी थी, जिससे उसका सुगठित सीना साफ दिख रहा था। नैना उसके ऊपर थी, उसका चेहरा कबीर के चेहरे के इतने करीब था कि दोनों की नाक आपस में छू रही थी। दोनों की धड़कनें किसी ड्रम की तरह बज रही थीं।
"कबीर..." नैना ने बेहद धीमी आवाज में कहा।
"हम्म..." कबीर सिर्फ इतना ही बोल पाया। उसकी नजरें नैना के होंठों पर टिक गई थीं। इस भयानक और अजीब स्थिति में भी, दोनों के बीच एक अजीब सी कशिश पैदा हो चुकी थी। कबीर का हाथ धीरे से नैना की कमर पर चला गया।
तभी अचानक, एक तेज 'डिंग' की आवाज हुई। लिफ्ट की बिजली वापस आ गई।
और इससे पहले कि वे दोनों एक-दूसरे से अलग हो पाते, लिफ्ट के दरवाजे धीरे-धीरे खुलने लगे। सामने चौदहवीं मंजिल थी। और दरवाजे के ठीक बाहर खड़े थे—जापानी क्लाइंट्स का पूरा ग्रुप, कंपनी के प्रेसिडेंट (जो नैना के सगे चाचा भी थे), और कबीर का पूरा स्टाफ!
दरवाजा खुलते ही जो नजारा बाहर खड़े लोगों ने देखा, उसने सबके होश उड़ा दिए। कबीर अर्ध-नग्न हालत में जमीन पर लेटा था, और नैना उसके ऊपर बेहद आपत्तिजनक और उलझी हुई स्थिति में थी, दोनों के कपड़े अस्त-व्यस्त थे और चेहरे लाल थे।
कंपनी के प्रेसिडेंट की आंखें गुस्से से उबल पड़ीं। जापानी क्लाइंट्स ने आपस में कुछ फुसफुसाया और अपने सिर झुका लिए।
कबीर ने घबराकर दरवाजे की तरफ देखा। उसकी नौकरी, उसका करियर, उसका प्रमोशन—सब कुछ एक सेकंड में उसकी आंखों के सामने से धुंधला हो गया।
इस कहानी का सबसे चौंकाने वाला और मजेदार मोड़ अभी आना बाकी है — पढ़िए Part 2, जल्द आ रहा है hindistories.site पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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क्या यह कहानी किसी सच्ची घटना पर आधारित है?
नहीं, यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इसे पाठकों के मनोरंजन के लिए आधुनिक रोमांटिक-कॉमेडी (Rom-Com) शैली में लिखा गया है, जिसमें मजेदार और अजीबोगरीब परिस्थितियों को दर्शाया गया है।
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कबीर और नैना की कहानी के कुल कितने भाग हैं?
इस मजेदार रोमांटिक-कॉमेडी कहानी को कुल चार भागों (4 Parts) में विभाजित किया गया है। हर भाग में आपको नए ट्विस्ट और भरपूर मनोरंजन देखने को मिलेगा।
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क्या कबीर की नौकरी बच पाएगी?
जापानी क्लाइंट्स और कंपनी प्रेसिडेंट के सामने इस अजीब स्थिति में पकड़े जाने के बाद कबीर के करियर पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसका खुलासा आपको कहानी के दूसरे भाग (Part 2) में मिलेगा।
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इस कहानी का अगला भाग (Part 2) कब रिलीज होगा?
इस कहानी का अगला रोमांचक भाग बहुत जल्द hindistories.site पर प्रकाशित किया जाएगा। नवीनतम अपडेट के लिए वेबसाइट को फॉलो करते रहें।
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