रात के ठीक 12 बज रहे थे। चारों तरफ ऐसा सन्नाटा था मानो हवाओं ने भी सांस लेना बंद कर दिया हो। यह कहानी है रमेश और उसके जिगरी दोस्त सुमित (जिसे सब प्यार से 'समोसा' बुलाते थे, क्योंकि उसे हर वक्त भूख लगती थी) की। रमेश को अपने परदादा से वसीयत में एक पुरानी हवेली मिली थी। यह हवेली किसी आम शहर में नहीं, बल्कि 'शांतिपुर' नाम के एक ऐसे गांव में थी, जहाँ सूरज ढलते ही लोग अपने घरों के दरवाजे अंदर से तीन बार लॉक कर लेते थे।
रमेश वैसे तो बहुत बहादुर बनने का नाटक करता था, लेकिन सच कहूँ तो कॉकरोच देखकर भी उसकी चीख निकल जाती थी। दूसरी तरफ समोसा... उसे दुनियादारी, भूत-प्रेत या एलियंस, किसी से कोई मतलब नहीं था, जब तक कि उसके हाथ में खाने का डिब्बा हो।
अध्याय 1: हवेली का पहला खौफनाक नज़ारा
दोनों दोस्त अपनी खटारा बाइक से हवेली के मुख्य द्वार पर पहुंचे। हवेली का लोहे का गेट इतना पुराना था कि उसे देखकर ही टिटनेस का इंजेक्शन याद आ जाए। रमेश ने जैसे ही गेट को धक्का दिया, एक बहुत ही डरावनी और लंबी आवाज आई— 'चिर्र्र्र्र्र...'।
पर पीछे समोसा मजे से 'आलू भुजिया' का पैकेट फाड़ रहा था।
"अबे रमेश, अंदर चल ना। हवेली है या भूलभुलैया? मुझे अंदर जाकर मैगी बनानी है," समोसा ने भुजिया चबाते हुए कहा।
रमेश ने मन ही मन खुद को गाली दी और भारी कदमों से हवेली के अंदर प्रवेश किया। अंदर का हॉल बहुत विशाल था। दीवारों पर धूल की मोटी परत जमी थी और छत से लटकता हुआ एक पुराना झूमर हवा के बिना ही हल्का-हल्का हिल रहा था।
अध्याय 2: पायल की झंकार... और वो अजीब आवाज़
अचानक, हवेली के ऊपरी माले से किसी के चलने की आवाज़ आने लगी।
छम... छम... छम...
पायल की यह आवाज सुनकर रमेश के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने कहानियों में सुना था कि पायल की आवाज मतलब चुड़ैल का आना! उसने कांपते हुए समोसा का हाथ पकड़ा।
रमेश रोने वाले चेहरे के साथ बोला, "अबे मोटे! वो इंसान नहीं, भूत है! हम यहाँ से चलते हैं।"
तभी ऊपर से एक भारी, गूंजती हुई और बेहद डरावनी आवाज आई...
रमेश पसीने से भीग गया। लेकिन तभी उस खौफनाक आवाज के बाद एक अजीब सी आवाज आई— 'आउच! मम्मी रे!'
आवाज़ एकदम बदल गई थी। ऐसा लगा जैसे भूतनी का पैर किसी कील या मेज से टकरा गया हो।
"अरे यार, ये अँधेरे में टेबल किसने रख दी बीच में? मेरे पैर की छोटी ऊँगली छिल गई!" (भूतनी ऊपर ही ऊपर खुद से बड़बड़ा रही थी)।
रमेश और समोसा ने एक-दूसरे की तरफ देखा। रमेश का डर अब कंफ्यूजन (Confusion) में बदल गया था। "भाई, ये भूतनी डरा रही है या खुद डर रही है?"
अध्याय 3: तहखाने का रहस्य (Mystery of the Basement)
भूतनी की इस नौटंकी के बाद समोसा का डर बिल्कुल खत्म हो गया था। "छोड़ ना रमेश, कोई लोकल चोर होगा। चल किचन ढूंढते हैं।"
किचन ढूंढते-ढूंढते दोनों एक पुराने लकड़ी के दरवाजे के पास पहुँच गए, जो आधा खुला था। वहां से ठंडी और सीलन भरी हवा आ रही थी। दरवाजे के पीछे सीढ़ियां थीं जो एक गहरे तहखाने (Basement) की तरफ जा रही थीं।
नीचे पहुंचते ही उन्होंने जो देखा, उससे उनकी सांसें अटक गईं। तहखाने के बीचों-बीच एक पुरानी संदूक रखी थी, जिस पर खून से कुछ लिखा था। समोसा ने टॉर्च की रोशनी उस पर डाली। वहां लिखा था— "इसे कभी मत खोलना, वरना..."
अध्याय 4: वो खौफनाक पल (सस्पेंस)
अभी वे उस चेतावनी को पढ़ ही रहे थे कि अचानक तहखाने का लकड़ी का दरवाजा जोर से 'धड़ाम' की आवाज के साथ बंद हो गया। समोसा के हाथ से मोबाइल छूटकर गिर गया और टॉर्च बंद हो गई। चारों तरफ घना और जानलेवा अंधेरा छा गया।
रमेश की धड़कनें इतनी तेज हो गईं कि उसे अपने ही दिल की आवाज सुनाई देने लगी। अचानक, रमेश को महसूस हुआ कि उसके कंधे पर किसी ने एक बेहद ठंडे, बर्फ जैसे हाथ से छुआ।
अंधेरे में एक फुसफुसाती हुई, रूह कंपा देने वाली आवाज रमेश के कानों में गूंजी...
रमेश ने चीखने के लिए मुंह खोला, लेकिन तभी उस अंधेरे में एक दूसरी, बहुत ही अजीब सी घटना घटी...
उस बर्फ जैसे ठंडे हाथ ने रमेश का कंधा छोड़ा और गलती से अंधेरे में समोसा के गाल पर एक जोरदार 'थप्पड़' जड़ दिया!
समोसा जोर से चिल्लाया, "आउच! बे रमेश, तूने मुझे थप्पड़ क्यों मारा?"
रमेश ने कांपते हुए कहा, "मै.. मैंने नहीं मारा!"
तभी अचानक समोसा का मोबाइल फर्श पर ब्लिंक हुआ (रोशनी जली)। उस एक सेकंड की रोशनी में रमेश ने समोसा के ठीक पीछे जो चेहरा देखा... उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। वह चेहरा किसी इंसान का नहीं था, और उसके हाथ में समोसा का आधा खाया हुआ आलू भुजिया का पैकेट था!
क्या होगा आगे?
वह भयानक चेहरा किसका था? क्या वह कोई खतरनाक भूत था या बस एक नौटंकी? और सबसे बड़ा सवाल— भूत आलू भुजिया क्यों खा रहा था?
जानने के लिए पढ़ें इस हॉरर-कॉमेडी कहानी का भाग 2! (जल्द आ रहा है...)
इस कहानी के बारे में (Story Summary & FAQs)
यह कहानी किस शैली (Genre) की है?
यह एक हॉरर-कॉमेडी (Horror Comedy) कहानी है, जहाँ डरावने दृश्यों के साथ-साथ आपको हंसाने वाले मजेदार पल भी मिलेंगे। यह HindiStories.site की विशेष प्रस्तुति है।
रमेश और समोसा हवेली क्यों गए थे?
रमेश को यह पुरानी और खौफनाक हवेली उसके परदादा से वसीयत में मिली थी, जिसे देखने वह अपने खाने के शौकीन दोस्त समोसा के साथ गया था।
कहानी का अगला भाग कब आएगा?
इस रोमांचक कहानी का भाग 2 जल्द ही हमारी वेबसाइट hindistories.site पर प्रकाशित किया जाएगा। सस्पेंस का खुलासा अगले भाग में होगा!
Comments
Post a Comment