HindiStories.site पर आपका स्वागत है! यह हमारी सबसे चर्चित Romantic Comedy Hindi Story का तीसरा और आख़िरी भाग (Grand Finale) है। पिछले भाग में आपने देखा कि आरव और मीरा ने जब अपने प्यार का इज़हार किया, तो घरवालों ने एक बहुत बड़ा बम फोड़ दिया—मीरा की शादी परसों किसी और से तय कर दी गई है! क्या आरव अपना प्यार हार जाएगा? या मंडप में होगा कोई बड़ा धमाका? दिल थाम कर बैठिए, क्योंकि यह Love Story आपको हंसाते-हंसाते रुला देगी!
एक रात, ढेरों आंसू और 'ऑपरेशन किडनैप'
"यह कैसे हो सकता है? मेरी शादी परसों है और मुझे पता ही नहीं?" मीरा अपने कमरे में रो-रोकर बुरा हाल कर चुकी थी। आरव की हालत भी उससे कुछ कम नहीं थी। घरवालों ने दोनों के मोबाइल छीन लिए थे और दोनों को उनके कमरों में 'हाउस अरेस्ट' (नज़रबंद) कर दिया था।
रात के 2 बज रहे थे। आरव ने अपनी पुरानी अलमारी से एक डब्बा निकाला। उसमें वो सूखी हुई गुलाब की पंखुड़ियां और वो कैफे का बिल रखा था जो उनकी पहली मुलाकात की निशानी थी। उसे मीरा की वो मासूम सी हंसी याद आ रही थी, बारिश में ठिठुरना याद आ रहा था। वह किसी भी कीमत पर मीरा को खो नहीं सकता था।
तभी आरव के कमरे की बालकनी पर कुछ गिरने की आवाज़ आई। आरव ने दरवाज़ा खोला तो देखा वहाँ एक पत्थर पड़ा था, जिस पर एक चिट्ठी बंधी थी। चिट्ठी में लिखा था— "जीजाजी, मैं रोहन! नीचे आओ, 'ऑपरेशन किडनैप' शुरू करना है।"
मेहंदी वाले दिन का तमाशा
मीरा के घर पर 'मेहंदी' का फंक्शन चल रहा था। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। आरव को अंदर जाना था, लेकिन गेट पर मीरा के पापा के बाउंसर खड़े थे। रोहन के "शानदार" प्लान के मुताबिक, आरव ने ढोल वाले का वेश बनाया। सिर पर बड़ा सा साफा, चेहरे पर नकली मूंछ और गले में एक बड़ा सा ढोल।
आरव ढोल बजाते हुए अंदर पहुंचा। उसकी नज़रें मीरा को ढूंढ रही थीं। तभी उसने देखा कि कोने में बैठी मीरा के हाथों में मेहंदी लग रही थी। उसका चेहरा उदास था। आरव किसी तरह खिसक कर मीरा के पास गया और ढोल की आड़ में फुसफुसाया, "मीरा... मैं हूँ, आरव।"
मीरा ने जैसे ही आरव की आवाज़ सुनी, उसकी आँखें चमक उठीं। लेकिन इससे पहले कि वो कुछ बोल पाती, मीरा की आंटी वहाँ आ गईं।
बेचारे आरव को अगले दो घंटे तक पागलों की तरह ढोल बजाना पड़ा। उसके हाथों में छाले पड़ गए, लेकिन वह एक बार भी मीरा से ठीक से बात नहीं कर पाया। रात होते-होते उसे वहाँ से भागना पड़ा क्योंकि उसकी नकली मूंछ आधी लटक गई थी।
शादी का दिन और 90s की फिल्मों वाला ड्रामा
आखिरकार वह मनहूस दिन आ ही गया। मीरा लाल जोड़े में सजी मंडप में बैठी थी। उसकी आँखों से लगातार आंसू बह रहे थे। सामने दूल्हा बैठा था, जिसके चेहरे पर सेहरा (फूलों की लड़ियां) बंधा हुआ था। पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे— "मंगलम भगवान विष्णु..."
मीरा के पापा ने कहा, "बेटा, हाथ आगे करो, गठबंधन का समय हो गया है।"
तभी पीछे से एक ज़ोरदार आवाज़ आई— "रुक जाइय्येएएएए!"
सबने मुड़कर देखा। दरवाज़े पर आरव खड़ा था। उसकी आँखें लाल थीं, बाल बिखरे हुए थे और वह ज़ोर-ज़ोर से हांफ रहा था। आरव की मम्मी और पापा भी पीछे-पीछे आ गए थे।
मंडप में सन्नाटा छा गया। मीरा आरव की बातें सुनकर सिसक-सिसक कर रोने लगी। वह उठकर आरव के पास जाना चाहती थी, लेकिन तभी मीरा के पापा ने एक ज़ोरदार ठहाका लगाया।
हाहाहाहा!
आरव और मीरा चौंक गए। मीरा के पापा आरव की मम्मी से बोले, "देखा बहन जी! मैंने कहा था ना कि अगर इसे थोड़ा सा भी डराएंगे, तो ये खुद चलकर आएगा और सबके सामने इज़हार करेगा!"
द ग्रैंड ट्विस्ट: "असली दूल्हा कौन है?"
आरव का दिमाग चकरा गया। "क्या मतलब? अंकल, मीरा की शादी तो इस लड़के से हो रही है ना?" आरव ने मंडप में बैठे दूल्हे की तरफ इशारा किया।
तभी मंडप में बैठे दूल्हे ने अपने चेहरे से सेहरा हटाया। वह कोई और नहीं, बल्कि रोहन था!
आरव की मम्मी आगे आईं और आरव का कान पकड़कर बोलीं, "अरे गधे! तू क्या सोचता है, तू और मीरा जो झूठी लड़ाइयों का नाटक करते थे, वो हमें पता नहीं चलता था? हम माता-पिता हैं, तुम्हारी हर चालाकी समझते हैं। जब हमें लगा कि तुम दोनों एक-दूसरे को चाहने लगे हो, लेकिन इज़हार करने में डर रहे हो, तो हमने ये 'नकली शादी' का ड्रामा रचा!"
मीरा ने अपने पापा की तरफ देखा, "पापा! आपने मुझे भी नहीं बताया? मैं दो दिन से रो-रोकर अपनी जान निकाल रही हूँ!"
पापा ने मुस्कुराकर मीरा के आंसू पोछे, "अगर तुझे बता देते बेटा, तो ये 'ओवर-स्मार्ट इंजीनियर' ढोल वाला बनकर कैसे आता? और ये इतना अच्छा भाषण कैसे देता?"
पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। आरव ने एक गहरी सांस ली। वह समझ गया था कि उसके माता-पिता ने उसी के कोड (प्लान) को उसी पर हैक कर दिया था।
आरव धीरे से मीरा के पास गया, उसका हाथ पकड़ा और मुस्कुराते हुए कहा, "तो... क्या तुम इस बेवकूफ ढोल वाले से शादी करोगी?"
मीरा ने आरव को एक हल्का सा मुक्का मारा और रोते हुए हंस पड़ी— "करना ही पड़ेगा, वरना मेरा 'ऑपरेशन किडनैप' वाला भाई मुझे चैन से जीने नहीं देगा।"
पंडित जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "अगर आप लोगों का नाटक खत्म हो गया हो, तो असली दूल्हे को बिठाएं? मुहूर्त निकला जा रहा है!" आरव ने मंडप में रोहन की जगह ली, और दोनों ने हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।
🎉 और इस तरह 'अरेंज मैरिज' बन गई एक 'परफेक्ट लव मैरिज'! 🎉
प्यार हमेशा अपना रास्ता ढूंढ लेता है, बस कभी-कभी घरवालों का 'छोटा सा नाटक' उसे मंज़िल तक जल्दी पहुंचा देता है!
पूरी कहानी पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर दें!
कहानी का निष्कर्ष (Ending Summary of the Story)
इस Romantic Comedy Story in Hindi के आख़िरी भाग में आरव अपनी जान की बाज़ी लगाकर मीरा को मंडप से आज़ाद कराने आता है। लेकिन वहाँ उसे ज़िंदगी का सबसे बड़ा Surprise Twist मिलता है। दरअसल, आरव और मीरा के घरवालों को उनके प्यार के बारे में पहले से पता था। उन्हें मिलवाने के लिए ही घरवालों ने इस नकली शादी का जाल बुना था। आख़िरकार आरव और मीरा की शादी उसी मंडप में धूमधाम से हो जाती है।
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Very Twisted Masaledar story 😊
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