बबलू का सुपर-डुपर 'डाइट प्लान' और समोसे का गुप्त अभियान: एक हास्य कहानी

परिचय: जब पेट औरान और दिमाग के बीच छिड़ जाए जंग

हर साल जनवरी का महीना आते ही दुनिया के करोड़ों लोग एक कसम खाते हैं—इस साल तो वजन कम करके ही मानेंगे! हमारे मोहल्ले के बबलू जी भी इस क्रांतिकारी आंदोलन में सबसे आगे थे। बबलू जी यानी जिनका वजन देखकर धरती माता भी थोड़ा संभलकर चलती हैं। इस बार उनकी बीवी सरला जी ने उन्हें अल्टीमेटम दे दिया था कि अगर इस महीने दस किलो वजन कम नहीं हुआ, तो डिनर में सिर्फ उबली हुई घास मिलेगी। बस फिर क्या था, बबलू जी ने इंटरनेट से दुनिया का सबसे खतरनाक और नया डाइट प्लान डाउनलोड कर लिया।

इंटरनेट वाला जादुई डाइट प्लान और बबलू का जोश

बबलू जी ने सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी पुरानी डिजिटल मशीन पर पैर रखा। मशीन ने जो नंबर दिखाया, उसे देखकर बबलू की चीख निकल गई। उन्होंने तुरंत अपनी जीवनशैली बदलने का संकल्प लिया। नए डाइट चार्ट के अनुसार, सुबह उठकर खाली पेट करेले का जूस पीना था, दोपहर में सिर्फ सलाद और रात को हवा या पानी के सहारे जिंदा रहना था।

पहले दिन तो जोश-जोश में बबलू ने आधा लीटर करेले का जूस ऐसे गटक लिया जैसे वह कोई ठंडी बियर हो। लेकिन भाई साहब, जुबान का स्वाद भी कोई चीज होता है! शाम होते-होते बबलू के पेट में चूहों की जगह खरगोश कूदने लगे। उनका शरीर जिम जाने के लिए मना कर रहा था, लेकिन उनका दिमाग सिर्फ एक ही चीज रट रहा था—गरमा-गरम समोसा और पुदीने की तीखी चटनी!

पंडित जी की दुकान और समोसे का गुप्त अभियान

तीसरे दिन रात के दस बज रहे थे। घर में सन्नाटा था। सरला जी गहरी नींद में सो रही थीं। तभी बबलू जी की आंख खुली और उनके नाक में कहीं से उड़कर आ रही समोसे की सोंधी खुशबू टकराई। बस, यहीं से शुरू हुआ उनका सीक्रेट 'समोसा मिशन'। बबलू ने धीरे से पैर निकाले, चोरी-छिपे चप्पल पहनी और सीधे गली के नुक्कड़ पर बैठे पंडित जी की दुकान की तरफ निकल पड़े।

अंधेरी रात में बबलू ऐसे चल रहे थे जैसे कोई जासूस किसी खुफिया मिशन पर हो। उन्होंने चारों तरफ देखा, कोई नहीं था। उन्होंने पंडित जी से फुसफुसाते हुए कहा, 'पंडित जी, जल्दी से दो समोसे पैक कर दो, लेकिन ऐसे देना कि किसी को पता न चले। डाइट चल रही है भाई साहब!' पंडित जी मुस्कुराए और गरमा-गरम समोसे एक काले लिफाफे में डालकर थमा दिए।

रंगे हाथों पकड़े जाने का मजेदार ड्रामा

बबलू जी समोसे लेकर पार्क की बेंच पर बैठे और जैसे ही पहला क्रिस्पी टुकड़ा मुंह में डालने वाले थे, पीछे से एक टॉर्च की रोशनी सीधे उनके चेहरे पर पड़ी। अरे! यह और कोई नहीं, बल्कि उनकी अपनी पत्नी सरला जी थीं, जो वॉक के बहाने उनका पीछा कर रही थीं।

  • सरला जी: 'वाह बबलू जी! यही है आपका फैट-बर्निंग डाइट प्लान?'
  • बबलू जी (घबराते हुए): 'अरे सरला! तुम यहाँ? वो... वो मैं तो समोसे से वजन चेक कर रहा था कि इसमें कैलोरी ज्यादा है या कम!'
  • सरला जी: 'अच्छा! तो अब इस समोसे को अपने पेट में डालकर ही चेक कर लो, और कल सुबह से तुम्हें जिम के साथ-साथ हमारी डांट भी मुफ्त में मिलेगी।'

निष्कर्ष

इस घटना के बाद बबलू का वो 'सुपर-डुपर डाइट प्लान' हमेशा के लिए दफन हो गया। वजन तो कम हुआ या नहीं, यह भगवान जाने, लेकिन उस रात के बाद से बबलू जी जब भी समोसा खाते हैं, तो घर के बजाय किसी दूर के मोहल्ले में छिपकर खाते हैं। तो दोस्तों, वजन घटाना अच्छी बात है, लेकिन पेट की सुनिए और दिल खुश रखिए, क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है और समोसे बहुत क्रिस्पी!

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